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"श्रृंगेरी शंकराचार्य के अनुपम उपदेश" पुस्तक में दक्षिणाम्नाय श्रृंगेरी शारदापीठ के ३५वें जगद्गुरु शंकराचार्य अनंत श्री विभूषित श्री अभिनव विद्यातीर्थ महास्वामी जी के तप तप्त जीवन के प्रेरक प्रसंगों का वर्णन है जिसमें उनके पीठारोहण से लेकर उनके उत्तराधिकार समर्पण तथा उनके द्वारा संचालित विजय यात्राओं का विस्तृत विवरण है। पुस्तक में कहा गया है कि वेद- पुराण आदि के प्रकांड विद्वान होते हुए भी वे अपने उपदेशों के माध्यम से सामान्य जन के हृदयों में गहरी छाप छोड़ते थे। उन्होंने गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा मुद्रित मासिक पत्रिका 'कल्याण' के लिए वर्ष १९६६ से लेकर वर्ष १९८६ के बीच अनेक निबंध लिखे जिनके माध्यम से जन-मानस में सनातन धर्म के प्रति गहन आस्था जगाई। प्रस्तुत पुस्तक श्रृंगेरी शारदापीठ के वर्तमान जगद्गुरु शंकराचार्य श्री भारती तीर्थ महास्वामी जी की प्रेरणा से प्रकाशित होने जा रही है।उल्लेखनीय है कि उनके द्वारा संपन्न अनेक विजय यात्राओं में वर्ष १९६७ में की गई नेपाल यात्रा अत्यंत महत्वपूर्ण है ,जब उन्होंने महाशिवरात्रि का पर्व वहाँ पर संपन्न किया था। यह पुस्तक श्रृंगेरी शारदापीठ के ३७ वें जगद्गुरु शंकराचार्य श्री विधुशेखर भारती जी द्वारा मई २०२६ में संपन्न धर्म विजय यात्रा की स्मारिका के रूप में प्रकाशित की जा रही है। आशा है, सुधी पाठकों,जिज्ञासुओं और साधकों को इस कृति से प्रचुर मार्गदर्शन प्राप्त होगा।
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